ICSE परिणामः- भतीजी ने किया टाॅप वहीं बुआ को मिला दूसरा स्थान


                                डान बास्को में प्रियांशी ने किया टाॅप, स्नेहा द्वितीय

महमूदाबाद, (सीतापुर)
      आईसीएसई बोर्ड के परीक्षा परिणामों में महमूदाबाद क्षेत्र में बेटियों ने दम दिखाया। क्षेत्र के एकमात्र आईसीएसई बोर्ड के स्कूल डान बास्को हाईस्कूल का परिणाम बेहद चैंकाने वाला रहा। एक ही परिवार की दो बेटियों ने प्रथम और द्वितीय स्थान पर कब्जा जमाया। डान बास्को हाईस्कूल की छात्रा प्रियांशी सोनी ने 94.60 प्रतिशत अंक अर्जित कर कालेज टापर बनीं। वहीं रिश्ते में प्रियांशी की बुआ लगने वाली स्नेहा सोनी ने 92.80 अंक अर्जित कर द्वितीय स्थान प्राप्त किया। परीक्षा परिणामों में बुआ-भतीजी की सफलता के बाद हर तरफ बधाईयों का तांता लग गया। दोनो के परिवार वाले जहां बेहद खुश रहे वहीं पूरे क्षेत्र में सफलता की चर्चा होने लगी। छात्रा प्रियांशी भविष्य में मेडिकल के क्षेत्र में कैरियर बनाने के लिए कोटा राजस्थान में तैयारी कर रही है। नगर पालिका महमूदाबाद के कटरा वार्ड निवासी सर्राफा व्यवसायी दीपक सोनी ने बताया कि उसकी बेटी प्रियांशी मे डाक्टर बनकर देश सेवा करना चाहती है। बेटी के सपनों को साकार करने के लिए उसके बताए अनुसार तैयारी के लिए कोटा भेजा है। कालेज में टाप करने पर उसकी मां सुनीता व भाई काफी खुश हैं।
      स्नेहा के पिता संदीप सोनी नगर के मुख्य मार्ग पर नई बाजार दक्षिणी में सर्राफा कारोबार करते हैं। स्नेहा के पिता संदीप ने बताया कि कालेज में होने वाली परीक्षाओं में स्नेहा का स्थान सर्वोच्च रहता था मेरी बेटी स्नेहा भविष्य में डाक्टर बनना चाहती है। स्नेहा ने कहा कि उसने आगे की पढ़ाई में और मेहनत करके कालेज ही नहीं जिले मे टाप करने का लक्ष्य बनाया है।
      कालेज में तीसरे स्थान पर रहे आकाश यादव ने 92.20 अंक प्राप्त कर तीसरे स्थान पर रहे। इनके पिता राजेंद्र यादव बिसवां तहसील के चांदपुर के रहने वाले हैं। दीवानी न्यायालय में सूट क्लर्क के महमूदाबाद में तैनात हैं। बेटे की कामयाबी पर काफी खुश हैं। बेटे आकाश ने बताया कि वह आईसीएससी बोर्ड से ही इंटर करके भविष्य में प्रशासनिक अधिकारी बनकर देश की सेवा करना चाहता है।
      कालेज में स्थान प्राप्त करने पर उसके शिक्षकों व कालेज के फादर डैनिस डिसूजा, दीपक अमित पीटर, वीपी सिंह, नदीम अहमद, मंजूलता व सिस्टर रोजेली, विधायक व पूर्व काबीना मंत्री नरेंद्र सिंह वर्मा, चेयरमैन मो. अहमद, भाजपा नेत्री आशा मौर्य, मोहन प्रसाद बारी आदि ने बधाई दी।




                                             महमूदाबाद, सीतापुर

ये हैं क्षेत्र टाॅप टेन टाॅपर्स
1. प्रियांशी सोनी  - 94.60
2. स्नेहा सोनी - 92.80
3. आकाश यादव - 92.20
4. आदर्श कुमार - 91.80
5. सिद्धार्थ यादव - 91.00
6. सिद्धार्थ सिंह  - 91.00
7. अम्बिका सिंह - 87.80
8. आलोक कुमार - 87.00
9. अविनाश तिवारी  -       83.80
10. मोहम्मद उमर         -       83.80


     


सपा नेता सहित छह पर अपहरण और लूट का मुकदमा दर्ज


महमूदाबाद, सीतापुर
      सेउता विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी रहे शिवकुमार गुप्त सहित छह लोगों पर महमूदाबाद कोतवाली में अपहरण, छिनैती व मारपीट सहित विभिन्न धाराओं मुकदमा पंजीकृत हुआ।




       रामपुर मथुरा थानाक्षेत्र के मैकूपुरवा निवासी सुशील मौर्य पुत्र कामता प्रसाद ने कोतवाली महमूदाबाद पुलिस को दिए गए प्रार्थनापत्र में बताया है कि लखनऊ जनपद के विकास नगर थानाक्षेत्र के मामा चैराहा निवासी शिवकुमार गुप्त पुत्र प्यारेलाल स्थायी निवासी कटरा बाजार महमूदाबाद ने अपने बिसवां मार्ग स्थित कुबेर कोल्ड स्टोर पर तीन अप्रैल को उसे बुलाया। वहां पहुंचने पर शिवकुमार गुप्त ने स्टोर मैनेजर हरिश्चंद्र मिश्र तथा मो. अबू बकर व तीन अन्य साथियों के साथ बंधक बना लिया तथा मारने-पीटने के साथ-साथ मेरी मोटर साइकिल, सोन की चैन व अंगूठी छीन ली। सुशील के मुताबिक इसके बाद उसे जबरिया बंधक बनाकर लखनऊ ले जाया गया।




जहां 10 दिन उसे बंधक बनाकर रखा गया। किसी तरह वह भागकर वहां से निकल आया। सुशील ने 25 मई को महमूदाबाद कोतवाली पहुंचकर प्रार्थनापत्र देते हुए रिपोर्ट दर्ज किए जाने की मांग की। पुलिस ने मामला धारा 323, 342, 392, 504, 506 आईपीसी के तहत दर्ज कर जांच शुरू की। इस संबंध में एसएसआई बलराम मिश्र से वार्ता की गई तो उन्होंने बताया कि वादी द्वारा दिए गए प्रार्थनापत्र के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।

तो क्या जिला बनने के लायक नहीं है महमूदाबाद?


आयुष जैन महमूदाबाद।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से मात्र 55 किमी दूर गांजर क्षेत्र का प्रमुख द्वार और जनपद सीतापुर की सबसे बड़ी तहसील महमूदाबाद खुद को जिला बनने का इंतजार कर रही है। महमूदाबाद के जिला बनना का मुद्दा उठते ही यहां के राजनीति में भूचाल ला देता है, हो भी क्यों न महमूदाबाद की जनता खुद को अलग जिले के रूप में स्थापित करना चाह रही है...।
 महमूदाबाद क्षेत्र राजधानी मुख्यालय से करीब 50 किमी वहीं जिला मुख्यालय सीतापुर से करीब 60 किमी दूर पर बसा है। जिले के रूप में स्थापित होने के बाद महमूदाबाद में बडा बदलाव देखने को मिल सकता है। महमूदाबाद भी अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को लेकर पूरे प्रदेश में अलग पहचान बनाए हुए है। महमूदाबाद में वर्तमान समय में दो राजकीय डिग्री कालेज, कई प्राइवेट डिग्री कालेज, एक प्रस्तावित विश्वविद्यालय, एक पालीटेक्निक और दर्जनो इण्टर कालेज स्थापित है।
महमूदाबाद जहां तहसील के रूप में जितना बडा है उतना ही विधानसभा के रूप में बडा है। विधानसभा महमूदाबाद में तीन विकास खण्ड आते हैं। इसी में नगर पालिका परिषद महमूदाबाद तथा एक नगर पंचायत पैतेपुर भी शामिल है। विकास खण्ड महमूदाबाद में करीब 76 ग्राम पंचायतें है। आबादी के हिसाब से पूरे जिले में सबसे बडी तहसील और विधानसभा के रूप में विख्यात है।
महमूदाबाद को जिला बनाने का मुद्दा उठाने का श्रेय उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री रहे डा. अम्मार रिजवी को ज्यादा है। सार्वजनिक मंच हो या चुनावी मुद्दा चाहे पत्रकार वार्ता डा0 अम्मार रिजवी आज भी महमूदाबाद को जिले के रूप में स्थापित करने की बातें करते हैं। नब्बे के दशक में सबसे पहले महमूदाबाद को तहसील का दर्जा मिलने के बाद तेजी से हुए विकास से अब महमूदाबाद अपने आप को जिला बनते देखना चाहता है। सरकारें आई और बदल गई लेकिन जिला बनाने का मुद्दा बस मुद्दा ही रहा। विधानसभा चुनाव हो या लोकसभा चुनाव महमूदाबाद को जिला का मुद्दा उठते देर नहीं लगती। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी बाबूपुर में अपनी जनसभा में कहा था ‘‘ अगर मेरी सरकार में कोई जिला बना तो महमूदाबाद सबसे पहला जिला होगा’’। हालांकि उनकी सरकार पूर्ण बहुमत की बनी। क्षेत्र से विधायक नरेन्द्र सिंह वर्मा को राज्यमंत्री का दर्जा मिला फिर कैबिनेट मंत्री लेकिन महमूदाबाद को जिले का दर्जा नहीं मिल सका। एक बार फिर 2017 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने कहा कि आप सरकार बनाइए हम जिला बनाएंगे लेकिन अब शायद जनता को उनकी बातों पर भरोसा नहीं रहा।
महमूदाबाद और उसका जिला बनने के बीच में कोई ज्यादा अंतर नहीं है ऐसा हमारे जनप्रतिनिधि चुनावों में कहते आए लेकिन मैने कुछ दस्तावेज निकाले जिनके आधार पर यह तय हुआ कि महमूदाबाद को जिला बनने के लायक ही नहीं है......
पहला दस्तावेज- विधानसभा में कार्यवाही 8 अगस्त 1991 तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी रहे। उस समय निर्वाचित होकर विधानसभा पहुंचे क्षेत्रीय विधायक नरेन्द्र सिंह वर्मा ने प्रश्नकाल के दौरान पर सवाल पूछा कि ‘‘क्या राजस्व मंत्री बताने की कृपा करेंगें कि जनपद सीतापुर की तहसील महमूदाबाद को जिला बनाने का कोई प्रस्ताव शासन में विचाराधीन है? यदि हां, तो इस सम्बंध में अब तक क्या कोईवाही हुई है?
जिसके प्रतिउत्तर में श्री ब्रम्हदत्त द्विवेदी ने उत्तर दिया कि जी नहीं।
दूसरे दस्तावेज- 17 फरवरी 2011 में बसपा की सरकार में मायावती मुख्यमंत्री बनीं। उस समय भी विधायक नरेन्द्र सिंह वर्मा ने सवाल दायर किया कि क्या राजस्व मंत्री बताने की कृपा करेंगें कि तहसील महमूदाबाद के व्यापक भू भाग तथा आबादी को देखते हुए क्या सरकार महमूदाबाद को जिला बनाने पर विचार करेगी? यदि नहीं तो क्यों?
जिसके प्रतिउत्तर में तत्कालीन मंत्री फागू चैहान ने कहा कि जनपद बनाने हेतु तहसील महमूदाबाद की जनसंख्या एवं क्षेत्रफल निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है...।

अब सवाल यह खड़ा हो गया कि मायावती की सरकार ने महमूदाबाद को जिला बनाने का मुद्दा सीधे तौर पर निरस्त ही कर दिया। जब सरकारी दस्तावेजों में महमूदाबाद जिला बनने के लायक ही नहीं है तो महमूदाबाद को जिला बनाने की राजनीति क्यों?

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने सीएम योगी से की मांग...........



Posted By Ayush Jain-

वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व कबीना मंत्री डा. अम्मार रिजवी ने उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर चहलारी घाट पुल का नाम राजा बलभद्र सिंह के नाम पर रखने की मांग करने के साथ पुल का लोकार्पण किये जाने की अपील की।



डा0 रिजवी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखते हुए कहा कि अक्टूबर 1988 में मैने सार्वजनिक निर्माण मंत्री लोक निर्माण की हैसियत से अमर शहीद राजा बलभद्र सिंह के गृह निवास चहलारी घाट पर एक पुल मंजूर किया था, जिसकी लागत उस समय 22 करोड़ थी। राजा बलभद्र सिंह उन महान वीरों में से है जिन्होने अंग्रेजों के खिलाफ न केवल लडाई लडी बल्कि अपना सर्वत्र न्यौछावर कर दिया। युद्ध के दौरान ही राजा बलभद्र सिंह की शादी हुई और वह अपनी बारात लेकर वापस आ रहे थे तो उन्हें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की वीरांगना बेगम हजरत महल ने सूचित किया कि अंग्रेजों की फौज लखनऊ की ओर बढ रही है। अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए बलभद्र सिंह ने अपनी बारात को अपने छोटे भाई के हवाले कर दिया और स्वयं मातृभूमि की रक्षा के लिए अंग्रेजों से लडते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।






 डा0 रिजवी ने लिखा कि चहलारी के इस पुल से दिल्ली, कोलकाता का फासला कम होने के साथ साथ लखनऊ से बहराईचख् सीतापुर, लखीमपुर, हरदोई व बाराबंकी का फासला बहुत कम हो जाता है। इस पुल क्षेत्र का सर्वांगीण विकास होगा। उन्होने कहा कि मैने उस समय पत्रावलियों पर स्पष्ट आदेश दिए थे कि पुल पर अमर शहीद राजा बलभद्र सिंह की मूर्ति लगे और पुल के दोनो ओर हिन्दी, अंग्रेजी व उर्दू में पत्थर पर उनका इतिहास लगाया जाए परंतु अत्यंत खेद है कि बाद की सरकारों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। उन्होने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि जिन उद्देश्यों से इस पुल को स्वीकृति किया और बनवाया गया था उसी की पूर्ति के लिए इस पुल का नाम राजा बलभद्र सिंह के नाम पर रखा जाए और इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं करें। 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने सीएम योगी से की मांग...........



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वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व कबीना मंत्री डा. अम्मार रिजवी ने उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर चहलारी घाट पुल का नाम राजा बलभद्र सिंह के नाम पर रखने की मांग करने के साथ पुल का लोकार्पण किये जाने की अपील की।



डा0 रिजवी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखते हुए कहा कि अक्टूबर 1988 में मैने सार्वजनिक निर्माण मंत्री लोक निर्माण की हैसियत से अमर शहीद राजा बलभद्र सिंह के गृह निवास चहलारी घाट पर एक पुल मंजूर किया था, जिसकी लागत उस समय 22 करोड़ थी। राजा बलभद्र सिंह उन महान वीरों में से है जिन्होने अंग्रेजों के खिलाफ न केवल लडाई लडी बल्कि अपना सर्वत्र न्यौछावर कर दिया। युद्ध के दौरान ही राजा बलभद्र सिंह की शादी हुई और वह अपनी बारात लेकर वापस आ रहे थे तो उन्हें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की वीरांगना बेगम हजरत महल ने सूचित किया कि अंग्रेजों की फौज लखनऊ की ओर बढ रही है। अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए बलभद्र सिंह ने अपनी बारात को अपने छोटे भाई के हवाले कर दिया और स्वयं मातृभूमि की रक्षा के लिए अंग्रेजों से लडते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।




 डा0 रिजवी ने लिखा कि चहलारी के इस पुल से दिल्ली, कोलकाता का फासला कम होने के साथ साथ लखनऊ से बहराईचख् सीतापुर, लखीमपुर, हरदोई व बाराबंकी का फासला बहुत कम हो जाता है। इस पुल क्षेत्र का सर्वांगीण विकास होगा। उन्होने कहा कि मैने उस समय पत्रावलियों पर स्पष्ट आदेश दिए थे कि पुल पर अमर शहीद राजा बलभद्र सिंह की मूर्ति लगे और पुल के दोनो ओर हिन्दी, अंग्रेजी व उर्दू में पत्थर पर उनका इतिहास लगाया जाए परंतु अत्यंत खेद है कि बाद की सरकारों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। उन्होने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि जिन उद्देश्यों से इस पुल को स्वीकृति किया और बनवाया गया था उसी की पूर्ति के लिए इस पुल का नाम राजा बलभद्र सिंह के नाम पर रखा जाए और इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं करें। 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने सीएम योगी से की मांग...........






Ayush Jain 


महमूदाबाद, सीतापुर
वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व कबीना मंत्री डा. अम्मार रिजवी ने उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर चहलारी घाट पुल का नाम राजा बलभद्र सिंह के नाम पर रखने की मांग करने के साथ पुल का लोकार्पण किये जाने की अपील की।


डा0 रिजवी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखते हुए कहा कि अक्टूबर 1988 में मैने सार्वजनिक निर्माण मंत्री लोक निर्माण की हैसियत से अमर शहीद राजा बलभद्र सिंह के गृह निवास चहलारी घाट पर एक पुल मंजूर किया था, जिसकी लागत उस समय 22 करोड़ थी। राजा बलभद्र सिंह उन महान वीरों में से है जिन्होने अंग्रेजों के खिलाफ न केवल लडाई लडी बल्कि अपना सर्वत्र न्यौछावर कर दिया। युद्ध के दौरान ही राजा बलभद्र सिंह की शादी हुई और वह अपनी बारात लेकर वापस आ रहे थे तो उन्हें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की वीरांगना बेगम हजरत महल ने सूचित किया कि अंग्रेजों की फौज लखनऊ की ओर बढ रही है। अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए बलभद्र सिंह ने अपनी बारात को अपने छोटे भाई के हवाले कर दिया और स्वयं मातृभूमि की रक्षा के लिए अंग्रेजों से लडते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।



डा0 रिजवी ने लिखा कि चहलारी के इस पुल से दिल्ली, कोलकाता का फासला कम होने के साथ साथ लखनऊ से बहराईचख् सीतापुर, लखीमपुर, हरदोई व बाराबंकी का फासला बहुत कम हो जाता है। इस पुल क्षेत्र का सर्वांगीण विकास होगा। उन्होने कहा कि मैने उस समय पत्रावलियों पर स्पष्ट आदेश दिए थे कि पुल पर अमर शहीद राजा बलभद्र सिंह की मूर्ति लगे और पुल के दोनो ओर हिन्दी, अंग्रेजी व उर्दू में पत्थर पर उनका इतिहास लगाया जाए परंतु अत्यंत खेद है कि बाद की सरकारों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। उन्होने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि जिन उद्देश्यों से इस पुल को स्वीकृति किया और बनवाया गया था उसी की पूर्ति के लिए इस पुल का नाम राजा बलभद्र सिंह के नाम पर रखा जाए और इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं करें।

कोतवाली पुलिस ने सड़क पर बना ली अवैध बाउण्ड्रीवाल


शहर में कोतवाली का भवन ही बन गया जाम का प्रमुख कारण, विधानसभा में उठा मुद्दा
लोक निर्माण विभाग ने की पैमाइश, कई मकान और दुकान भी गिरने की जद में
Ayush Jain Mahmoodabad -         अतिक्रमण जैसी गंभीर समस्या से छुटकारा दिलाने में बढचढकर सहयोग करने वाली पुलिस ने भी महमूदाबाद की कोतवाली की बाउण्डी के रूप में पीडब्ल्यूडी की जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है। इससे बस स्टेशन व रामकुण्ड चैराहा पर जाम की स्थिति हर समय बनी रहती है। इस बात का खुलासा तब हुआ जब गत दिनों विधानसभा में लगाये गये प्रश्न पर पीडब्ल्यूडी ने बस स्टेशन से रामकुण्ड चैराहे तक की कोतवाली मार्ग के दोनों ओर सड़क व अपनी भूमि की पैमाइश कर निशानदेही की।


 इस निशानदेही से सड़क के दोनो ओर के कीमती रिहायशी व व्यवसायिक भवन जद में आने के साथ साथ कोतवाली की बाउण्ड्री के भीतर करीब दस फिट तक की भूमि पीडब्ल्यूडी की निकली। पीडब्ल्यूडी द्वारा की गई निशानदेही के बाद से जहां पुलिस विभाग में हडकम्प मच गया वहीं सडक के दोनो ओर रहने वाले भी काफी हलकान है।

यह भी पढें :- अखिलेश सरकार ने ठुकराया, योगी सरकार ने अपनाया....

17वीं विधानसभा के प्रथम सत्र के दौरान क्षेत्र से छठी बार निर्वाचित विधायक पूर्व कबीना मंत्री नरेन्द्र सिंह वर्मा ने अतराकांति प्रश्न के माध्यम से प्रदेश के नगर विकास मंत्री से प्रश्न करते हुए पूछा था कि सीतापुर की नगर पालिका परिषद महमूदाबाद के अंतर्गत रामकुण्ड चैराहे से राडवेज बस स्टेशन के बीच में थाना कोतवाली महमूदाबाद द्वारा मुख्य मार्ग के किनारे सड़क सीमा के अंतर्गत अवैध रूप से बाउण्ड्री बनाने के कारण हर समय जाम लगा रहता है यदि हाॅं तो क्या उक्त अवैध बाउण्ड्री को हटाया जायेगा जिसके सम्बंध में नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा विधायक के प्रश्न के उत्तर में बताया कि कोतवाली द्वारा सड़क सीमा तक अवैध रूप से बाउण्ड्री बनाई गई है उक्त सड़क लोक निर्माण विभाग की है अतः लोक निर्माण विभाग द्वारा सीमांकन करने के बाद अवैध बाउण्ड्री को हटाने की कार्यवाही की जायेगी।


यह भी पढें :-        विद्युत जेई के छूटे पसीने, हकलाते नजर आए क्रय केन्द्र प्रभारी

विधानसभा में अतिक्रमण सम्बंधी प्रश्न पूछे जाने के बाद नगर पालिका महमूदाबाद से जिलाधिकारी के माध्यम से सूचना चाही गई जिस पर नगर पालिका परिषद ने सूचित किया कि उक्त मार्ग पीडब्ल्यूडी का मार्ग है। लोक निर्माण विभाग द्वारा ही कोई कार्यवाही सम्भव है। नगर पालिका द्वारा मिली सूचना पर जिलाधिकारी ने पीडब्ल्यूडी विभाग से रामकुण्ड-बस स्टेशन मार्ग की भूमि का अधिग्रहण करना सम्बंधी आदेश निर्गत  किये गये। इस पर पीडब्ल्यूडी विभाग ने सड़क के साथ किनारे की भूमि का चिन्हांकन करते हुए मकानों पर लाल रंग से निशान लगा दिए। निशान लगने के साथ ही पुलिस विभाग व सड़क के दोनो ओर रहने वाले पूर्व चेयरमैन सुरेश वर्मा, आदर्श शुक्ला, जयपाल वर्मा, नत्थाराम वर्मा, धर्मचन्द जैन, चन्द्र जैन, विनोद कुमार इलेक्ट्रानिक्स सहित सभी का आवासीय व व्यवसायिक भवन टूटने का डर सता रहा है। इससे लोग काफी चिंतित है।